बलिया में मनाई गई भोजपुरी के शेक्सपियर, लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि

सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे भिखारी ठाकुर - डॉ० आदित्य कुमार 'अंशु'

बलिया। डॉ० रामसेवक विकल साहित्य कला संगम सेवा ट्रस्ट (न्यास) इसारी सलेमपुर बलिया ( उ०प्र०) स्थित कार्यालय पर शुक्रवार को भोजपुरी के शेक्सपियर, लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि मनाई गई। 
सर्वप्रथम गुड्डू गुलशन (सिवान बिहार ) के संगीतमय स्वर से मां सरस्वती की वंदना की गई । तत्पश्चात उपस्थित विद्वानों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर पूजन अर्चन किया । भिखारी ठाकुर और डॉ० रामसेवक 'विकल' जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। भिखारी ठाकुर को सभी लोगों ने श्रद्धांजलि दी। 
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ० (प्रो०) शैलेश सिंह 'शौर्य ' थे। 
कार्यक्रम में अशहर खुर्शीद के स्वर सरस्वती वंदना - "आजा ओ मैया- आजा ओ मैया दर्शन दे जा ओ मैया" से लोग मंत्र मुक्त हो गए। उसके बाद शेषनाथ विद्यार्थी द्वारा देवी गीत पचरा की प्रस्तुति मनमोहक थी। कुमारी प्रज्ञा शर्मा ने लोक साहित्य और लोकनाट्य में भिखारी ठाकुर, तथा उनपर हुई समीक्षाओं पर बात की। सतीश कुमार गुप्ता ने भिखारी ठाकुर से प्रेरणा लेने की बात कही। हरिओम श्रीवास्तव ने कहा कि आज भी अनेक नाट्य संस्थाएं उनके नाटकों का मंचन करती हैं। विनोद राजवंशी ने भिखारी ठाकुर को जनजन का कलाकार बताया। अफजल अहमद ने कहा कि उन्होंने रामलीला से लोक कलाकार का सफर बड़ी मेहनत और लगन से पूरा किया। डॉ० सेराज अंसारी ने कहा कि भिखारी ठाकुर और डॉ० रामसेवक 'विकल' के साहित्य को संजोकर रखने की जरूरत है। डॉ० आदित्य कुमार 'अंशु' ने भिखारी ठाकुर के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर के नाटकों का मंचन कर लोग अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। देश-विदेश में भी उनके नाटक देखे जाते हैं। उनके नाटकों में बिदेसिया, बेटी बेचवा, विधवा -विलाप, गबर घिचोर, पुत्रवधु, भाई- विरोध, कलयुग प्रेम आदि अनेक नाटक है। भिखारी ठाकुर ने सैकड़ों किताबें लिखकर भोजपुरी साहित्य का भंडार भर दिया। डॉ० शैलेश सिंह शौर्य ने कहा कि हजामत बनाने में मन नहीं लगा तो कलकत्ता गए वहां भी मन विचलित फिर वहां से जगन्नाथ पुरी गए और फिर गांव कुतुबपुर आ गए। अपने साथियों के सुझाव पर रामलीला करना आरंभ किया। मित्रों का सहयोग मिला और नाटक मंडली बनकर घूम-घूम नाटक करने लगे। 
अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में शैलेन्द्र श्रीवास्तव (पंकज) ने कहा की संजय उपाध्याय ने 'बिदेसिया' नाटक का मंचन आठ सौ से अधिक बार कराया है। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता शैलेंद्र श्रीवास्तव (पंकज) ने किया तथा संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० आदित्य कुमार 'अंशु' ने किया।
इस अवसर पर आशुतोष तिवारी, विजय राम, इमरान अली, सद्दाम अली सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
अंत में डॉ० आदित्य कुमार 'अंशु' ने सभी के प्रति आभार जताते हुए आगंतुकों द्वारा दिए गए बहुमूल्य समय के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।


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