बेल्थरा रोड, बलिया। बलिया जनपद के बेल्थरा रोड तहसील अंतर्गत पशुहारी शरीफ गांव से आज तड़के एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गांव की वयोवृद्ध 105 वर्षीया मोहतरमा किताबुन निशा (पत्नी स्वर्गीय कमरुद्दीन अंसारी) का आज तड़के इंतकाल हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। मरहूमा अपने पीछे चार पुत्र और तीन बेटियों सहित करीब 20 घरों में फैला एक भरा-पूरा खानदान छोड़ गई हैं।
मरहूमा के चार बेटों और चार बेटियों में से एक बेटी का पूर्व में ही इंतकाल हो चुका है। चूंकि परिवार के अधिकांश सदस्य नई दिल्ली और गाजियाबाद में रहते हैं, इसलिए उनके देर शाम या कल सुबह तक गांव पहुंचने की संभावना है। वहीं, गांव में रहकर अपनी मां की निरंतर खिदमत और देखभाल करने वाले उनके एकमात्र पुत्र मुमताज अहमद ने बताया कि मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा कल जोहर की नमाज़ के बाद पशुहारी स्थित कदीमी कब्रिस्तान में अदा की जाएगी।
मरहूमा के भतीजे और 'भारत मीडिया' के संपादक शब्बीर अहमद ने इस दुखद घड़ी में गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपने निजी जीवन के लिए अपूर्णीय क्षति बताया।
दुआओं का साया
शब्बीर अहमद ने कहा, "जब तक वे जीवित थीं, उनकी दुआओं का साया हमारे सर पर हमेशा रहा। उनसे रोज बात हुआ करती थी।"
उन्होंने बताया कि मरहूमा को हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैत से बेपनाह मोहब्बत थी। दक्षिण मोहल्ले में ताजियादारी को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। मोहर्रम का चांद दिखते ही वे हर व्यवस्था, आर्थिक सहयोग और सामान की देखरेख में खुद जुट जाती थीं ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
उनके भतीजों सिराजुद्दीन अंसारी और जुनैद अहमद ने भावुक होकर कहा कि अब हर मोहर्रम में उनकी कमी हमेशा खलेगी।
परिजनों व ग्रामीणों ने सभी से गुजारिश की है कि कल जोहर की नमाज के बाद होने वाली नमाज़-ए-जनाज़ा में अधिक से अधिक संख्या में शिरकत कर मरहूमा की मगफिरत (आत्मा की शांति) के लिए दुआ फरमाएं।



