कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक रहे। वहीं बलिया के ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
संगोष्ठी का विषय 'राष्ट्रकवि की अवधारणा एवं भारत के राष्ट्रकवि' था, जिसमें दो दर्जन से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें डॉ. आदित्य कुमार अंशु, डॉ.सुनील कुमार ओझा, डॉ. रमाशंकर वर्मा मनहर एवं डॉ. फतेहचंद बेचैन ने भी शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए अपना वक्तव्य दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने अपने वक्तव्य में बलिया जिले के साहित्य में राष्ट्रीय चेतना के इतिहास एवं राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रकवि की अवधारणा एवं राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य में राष्ट्रीय चिंतन को गंभीरता से रेखांकित किया।
बताते चलें कि इस संगोष्ठी में बलिया से जुड़े राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह भी उपस्थित रहे, और उनका साहित्य विशेष केंद्र में रहा। उनके महाकाव्य "आहुति" एवं "वेदमूर्ति" पर केंद्रित शोधपत्र भी प्रस्तुत किए गए। इन सभी शोधपत्रों को पुस्तकाकार रूप में डॉ. रवींद्र पूंजाराम ठाकरे द्वारा संपादित कर लगभग 500 पृष्ठीय ग्रन्थ 'राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि' के रूप में विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। जिनमें "आहुति" महाकाव्य के संपादक डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह 'संजय' भी सम्मिलित रहे।
छत्तीसगढ़ की धरती पर बलिया के साहित्यकारों का सम्मान और बलिया की धरती से जुड़े राष्ट्रकवि डॉ बृजेश सिंह के साहित्य पर विमर्श बलिया जनपद के लिए गर्व का विषय एवं महत्वपूर्ण उपलब्धि है।



