उभांव पुलिस की सराहनीय पहल, बाल-विवाह होने से रोका

बलिया। थाना उभांव क्षेत्रान्तर्गत ग्राम के निवासी द्वारा अपनी 16 वर्षीय पुत्री का गुप्त रूप से बाल विवाह किया जाना निश्चित किया गया था जिसकी जानकारी होने पर अधोहस्ताक्षरी द्वारा उक्त बाल विवाह को सम्पन्न होने से पहले पुलिस विभाग के सहयोग से बालिका के माता-पिता को परामर्श देकर बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा कानूनी पहलू के बारे में समझाया गया ।
उक्त बालिका के पिता ने बाल विवाह नहीं किए जाने हेतु शपथ पत्र दिया तथा लिखित रूप से अवगत कराया कि अपनी पुत्री का विवाह 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरान्त ही करूगां। इसके साथ ही जनपद वासियों से अपील किया जाता है कि बाल विवाह एक कुप्रथा है, इसे न होने दे, न ही करवायें। शादी के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष एवं लड़की की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। सामान्यतः समाज में लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है और समाज की रूढ़िवादी परम्परा के कारण लड़कियों की शादी जितनी जल्दी हो सके करा दी जाती है। शिक्षा की कमी और कानूनी जानकारी के अभाव के कारण भी बाल विवाह होते हैं। बाल विवाह कराने वाले और बाल विवाह में शामिल होने वालों व्यक्तियों जैसे पण्डित, मौलवी, पादरी, पिता एवं रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि के विरूद्ध दण्ड के रूप में दो साल का कठोर कारावास अथवा एक लाख रूपए जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इस तरह के बाल विवाह का दुष्परिणाम यह होता है कि कम उम्र में बाल विवाह करने से लड़कियों के परिपक्व न होने के कारण ज्यादा बच्चे भी पैदा हो जाते हैं और बच्चे कुपोषित होते हैं जिससे जनसंख्या वृद्धि भी होती है। बाल विवाह एक ज्वलंत समस्या है। इस प्रकार का मामला आने पर उसे पुलिस विभाग, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098, पुलिस हेल्पलाईन नम्बर 112, 1090, 181 महिला हेल्पलाईन एवं जिलाधिकारी महोदय को लिखित या मौखिक रूप से सूचना दे
सकते हैं। बाल विवाह को रोकने तथा बाल विवाह के दुष्परिणामें से आम जनता को जनजागरूक करने के लिये ब्लाक एवं तहसील स्तर पर बैठकों का आयोजन विभागीय कर्मचारियों द्वारा किया जाता है।
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