मऊ। शारदा नारायण हाॅस्पिटल में शनिवार को "आईवीएफ डे" आयोजन बड़े ही उत्साह पूर्वक किया गया।
इस अवसर पर बांझपन रोग विशेषज्ञ डॉ एकिका सिंह ने कहा कि आम जनमानस में ऐसी भ्रांति है कि आईवीएफ द्वारा कृत्रिम तरीके से संतान की उत्पत्ति होती है। यह पूर्णतया निराधार है। इस प्रक्रिया में शुक्र और वीर्य दोनों ही उसी महिला-पुरुष के होते हैं। उन्हें भ्रूण के रुप में विकसित करने के लिए पांच दिन तक प्रयोगशाला में रखा जाता है। इस भ्रांति से बाहर निकलकर निःसंतान महिलाओं को संतान प्राप्ति के लिए आईवीएफ तकनीकी बांझपन उपचार की सर्वोत्तम तकनीकी है। शारदा नारायण हास्पिटल स्थित इंदिरा आईवीएफ एवं टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर द्वारा अब तक तीन हजार से अधिक महिलओं को संतान प्राप्ति का सुख प्राप्त हो चुका है। देश सहित विदेशों से भी निःसंतान महिलाओं को यहां पर मातृत्व का सुख मिला है। उन्होंने आईवीएफ तकनीकी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उसे निःसंतान महिलाओं के लिए वरदान बताया।
वहीं एंब्रियोलाजिस्ट डॉ मधुलिका सिंह ने आईवीएफ दौरान होने वाली प्रक्रिया, उपचार की पद्धति और सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के उपरांत केक काटा गया और मरीजों को केक व फल का वितरण किया गया।



