रिपोर्ट - ओमप्रकाश सिंह
बेल्थरा रोड, बलिया। आज हम चर्चा करेंगे एक बेहद ही महत्वपूर्ण विषय की, जिस पर ध्यान देना हम सभी के लिए नितांत आवश्यक है, और वह है- जल संरक्षण।
बलिया के बेल्थरा रोड में हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार 'ग्रामीण जनता शिक्षण सेवा संस्थान खंदवा' द्वारा दो दिवसीय जल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला स्थानीय तहसील प्रांगण और स्व. हरिकेवल प्रेक्षा गृह में संपन्न हुई।
इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से वैज्ञानिक, निदेशक और कई गणमान्य व्यक्ति सम्मानित हुए और उन्होंने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था जल संचय और जल प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालना। वक्ताओं ने गंभीरता से आगाह किया कि यदि हम गिरते भूजल स्तर के प्रति अभी भी सचेत नहीं हुए, तो आने वाले समय में शुद्ध पेयजल के लिए तरसना पड़ सकता है। यह एक ऐसी चेतावनी है जिसे हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस गंभीर मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने का हर संभव प्रयास किया गया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन का विधिवत शुभारंभ एसडीएम अखिलेश कुमार यादव ने फीता काटकर किया। उन्होंने इस नेक मिशन की सराहना करते हुए आयोजक और ग्रामीण जनता शिक्षण सेवा संस्थान खंदवा की प्रबंधिका मीरा सिंह को हार्दिक बधाई दी। जल शक्ति मिशन के प्रति जागरूकता लाने के लिए नुक्कड़ नाटक और गीतों का भी सहारा लिया गया, जिसने लोगों के मन पर गहरा प्रभाव डाला।
संस्थान की प्रबंधिका मीरा सिंह ने ट्रेनरों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलवाया और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें उत्तराखंड से वैज्ञानिक अजय कुमार, नई दिल्ली से वैज्ञानिक नेहा सिंह, लखनऊ से जल शक्ति मिशन के निदेशक एन.पी. सिंह, वैज्ञानिक स्वेच्छा सिंह, प्रवक्ता मनोज सिंह, विधायक सलभ मणि त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार गुप्ता, बापू स्मारक इंटर कॉलेज, दरगाह, मऊ, राष्ट्रीय जल शक्ति नई दिल्ली के निदेशक प्रतिनिधि डॉ. राजाराम सिंह, नेहरू युवा केंद्र, बलिया के प्रबंधक राज कुमार पाण्डेय, बाबा मंशा दास शिक्षा निकेतन, वाराणसी के प्रबंधक अरविंद सिंह, अली सर्वोदय पीजी कॉलेज, घोसी के प्रोफेसर डॉ. धनंजय शर्मा, एमपी से बनवारी लाल धाकड़, छट्ठू राम, बिहार से डॉ. ऋषभ सिंह, शबीना परवीन सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
यह कार्यशाला जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और उम्मीद है कि इससे लोगों में जल संचय के प्रति जिम्मेदारी की भावना जागृत होगी।



