गाजीपुर। आस्था और अकीदत के प्रमुख केंद्र कटैला शरीफ से एक बेहद गमगीन कर देने वाली खबर सामने आई है। हजरत सूफी मोहिउद्दीन चिश्ती रहमानी (रहमतुल्ला अलैह) के तीसरे अबुलैस साहब अब इस दुनिया-ए-फानी में नहीं रहे। उनके इंतकाल की खबर फैलते ही पूरे इलाके और अकीदतमंदों में भारी शोक की लहर दौड़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
वालिद की मजार पर लगाई थी आखिरी हाजिरी
मजार के खादिम जहीर अहमद साहब ने बताया कि मरहूम, हजरत के चार साहबजादों में सबसे छोटे थे। अपने इंतकाल से पूर्व, बीते बृहस्पतिवार (14 मई 2026) को ही वह अपने परिजनों (अहलेखाना) के साथ पशुहारी शरीफ तशरीफ लाए थे। वहां उन्होंने अपने वालिद मोहतरम के मजारे मुबारक पर अकीदत के फूल पेश किए और अपने जीवन की आखिरी हाजिरी लगाई। इस दौरान मजार के खादिम जहीर अहमद साहब ने उनका और उनके परिजनों का खैरमकदम करते हुए पूरे एहतराम के साथ हाजिरी करवाई थी। किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि यह उनकी आखिरी जियारत होगी।
आज होंगे सुपुर्द-ए-खाक
कटैला से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नमाज-ए-जनाजा आज जुमे की नमाज के बाद अदा की जाएगी।
तदफीन (अंतिम संस्कार) नमाज-ए-जनाजा के मुकम्मल होने के बाद उन्हें कटैला शरीफ के कदीमी (प्राचीन) कब्रिस्तान में नम आंखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
इस दुखद घड़ी में दूर-दराज से अकीदतमंदों और मुरीदों का कटैला शरीफ पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है, ताकि वे अपने महबूब सूफी हजरत के साहबजादे के अंतिम दर्शन कर सकें और जनाजे में शिरकत कर सकें।



