सिकंदरपुर से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तक का सफर, प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली को मिली उर्दू विभाग की कमान

रिपोर्ट - गौहर खान 

सिकंदरपुर, बलिया। बलिया के सिकंदरपुर की धरती से निकलकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में उर्दू विभाग के अध्यक्ष पद तक पहुंचना प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली के लंबे शैक्षिक, साहित्यिक और अकादमिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 10 अगस्त 2026 से उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार उनका कार्यकाल तीन वर्ष का है।
सिकंदरपुर से शुरू हुआ शिक्षा का सफर
प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली की प्रारंभिक शिक्षा सिकंदरपुर के गांधी इंटर कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई मजिदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज, इलाहाबाद से पूरी की। उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते हुए उन्होंने कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उनका रुख दिल्ली की ओर हुआ, जहां उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा जारी रखी। उन्होंने उर्दू विषय में एमए, एम.फिल. और पीएचडी की उपाधियां दिल्ली यूनिवर्सिटी से हासिल कीं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की आधिकारिक प्रोफाइल भी उनके पीएचडी और प्रोफेसर पद की पुष्टि करती है।रेडियो से अध्यापन तक का अनुभव
अकादमिक क्षेत्र में पहचान बनाने से पहले प्रो. अजमली ने ऑल इंडिया उर्दू रेडियो सर्विस में एनाउंसर के रूप में भी काम किया। इस दौरान उनकी भाषा, साहित्य और प्रस्तुति क्षमता को व्यापक मंच मिला।
इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन पीजी ईवनिंग कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में अध्यापन किया। उपलब्ध प्रकाशित विवरणों के अनुसार, एएमयू में आने से पहले उन्होंने दिल्ली में अध्यापन का अनुभव हासिल किया था।
1997 में एएमयू से जुड़ा रिश्ता
प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नियुक्ति वर्ष 1997 में लेक्चरर के रूप में हुई। इसके बाद उन्होंने लगातार विश्वविद्यालय में अध्यापन, शोध और साहित्यिक गतिविधियों के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
लगभग तीन दशकों के इस अकादमिक सफर में उन्होंने उर्दू भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अध्यापन के साथ शोध एवं लेखन का काम भी किया। वे उर्दू साहित्य के जाने-माने अध्येता और शायर के रूप में भी पहचाने जाते हैं। उनके शोध-पत्र, समीक्षा लेख और साहित्यिक निबंध प्रकाशित हुए हैं। उनकी चर्चित पुस्तक ‘तरक्की पसंद तहरीक और उर्दू ग़ज़ल’ भी प्रकाशित हो चुकी है।
साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय
प्रो. अजमली का जुड़ाव केवल कक्षा और शोध तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे विश्वविद्यालय के कल्चरल एजुकेशन सेंटर के कोऑर्डिनेटर तथा यूनिवर्सिटी डिबेटिंग एंड लिटरेरी क्लब के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें हरिश्चंद्र कठपालिया गोल्ड मेडल फॉर क्रिएटिव राइटिंग, फजलेहक 7खैराबादी आवार्ड सीतापुर,दिल्ली उर्दू अकादमी टॉपर्स अवॉर्ड, दिल्ली उर्दू अकादमी अवॉर्ड फॉर बुक तथा शिखर श्री अवॉर्ड जैसे सम्मान भी मिले हैं।
अब संभालेंगे उर्दू विभाग की कमान
लंबे समय तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अध्यापन और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद अब प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली को विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उन्हें 10 अगस्त 2026 से तीन वर्ष के लिए विभाग का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
सिकंदरपुर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है कि स्थानीय परिवेश से निकलकर प्रो. अजमली ने राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अपनी अलग पहचान बनाई और अब उसी विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं।
सिकंदरपुर लौटे तो पुरानी यादों में भावुक हुए
अपने पैतृक क्षेत्र सिकंदरपुर पहुंचने पर प्रो. अजमली का स्थानीय स्तर पर स्वागत भी हुआ। अपने पुराने शैक्षिक परिवेश और लोगों के बीच पहुंचकर उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद किया। उनके सफर की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो छोटे कस्बों से निकलकर उच्च शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।
सिकंदरपुर की मिट्टी से शुरू हुआ यह सफर आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग की जिम्मेदारी तक पहुंच चुका है। प्रो. सैयद सिराजुद्दीन अजमली की यह उपलब्धि निश्चित रूप से सिकंदरपुर और पूरे बलिया के लिए गर्व का विषय है।
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