मौलाना सज्जाद रशीदी साहब को पेश किया गया ख़राज-ए-अकीदत, चेहल्लुम पर हुई कुरआनख्वानी व दुआ

रिपोर्ट - गौहर खान 
सिकंदरपुर, बलिया। मदरसा दारुल उलूम सरकारी आसी के संस्थापक मौलाना सज्जाद रशीदी साहब के चेहल्लुम के मौके पर अकीदतमंदों ने उन्हें ख़राज-ए-अकीदत पेश किया। इस अवसर पर कुल शरीफ, कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी, दुआ और तबरुकता का ऐहतमाम किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले, मुरीदीन और अकीदतमंद शामिल हुए।
कार्यक्रम में गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, लखनऊ, महाराष्ट्र, बलिया, देवरिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने शिरकत की और मरहूम मौलाना सज्जाद रशीदी साहब के लिए ईसाले सवाब किया। लोगों ने उनके लिए मगफिरत की दुआ करते हुए उनके धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक योगदान को याद किया।
दारुल उलूम सरकारी आशिक में शाम के समय विशेष महफिल का आयोजन किया गया। इसमें नात-ए-पाक पेश की गई और दुआ के साथ मरहूम मौलाना की जिंदगी और उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मौलाना सज्जाद रशीदी साहब ने दीन और तालीम की खिदमत को अपनी जिंदगी का अहम मकसद बनाया। दारुल उलूम की स्थापना और उसके विकास के लिए उनकी मेहनत, लगन और मार्गदर्शन को हमेशा याद रखा जाएगा।
कार्यक्रम में मौजूद अकीदतमंदों ने कहा कि दारुल उलूम सरकारी आसी को कायम रखने, उसे आगे बढ़ाने और उसकी शैक्षिक व धार्मिक गतिविधियों को मजबूत करने में मौलाना सज्जाद रशीदी साहब का योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने अपनी इल्मी और सामाजिक सेवाओं के माध्यम से लोगों को शिक्षा, धार्मिक ज्ञान और नेक रास्ते की ओर प्रेरित किया।
चेहल्लुम के इस मौके पर उनके चाहने वालों ने संकल्प लिया कि मौलाना सज्जाद रशीदी साहब ने जिस उद्देश्य और सोच के साथ दारुल उलूम की बुनियाद रखी थी, उसे आगे बढ़ाने के लिए सभी मिलकर प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे तथा मरहूम मौलाना की मगफिरत और दर्जात की बुलंदी के लिए विशेष दुआ की गई।
इस अवसर पर उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़ और लोगों की आंखों में नजर आ रही श्रद्धा ने यह साबित किया कि मौलाना सज्जाद रशीदी साहब ने अपनी इल्मी और सामाजिक सेवाओं के जरिए लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई थी।
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