बलिया के किकोढ़ा गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची डॉ. इफ्तेखार खान की प्रतिभा

रिपोर्ट - बलिया ब्यूरो 

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित हुए बलिया के कला शिक्षक, नि:शुल्क शिक्षा से सैकड़ों बच्चों को दिखाई नई राह

बलिया। जनपद के सिकंदर पुर क्षेत्र के छोटे से गांव किकोढ़ा से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले कला शिक्षक डॉ. इफ्तेखार खान को शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने से बलिया जिले के साथ-साथ सिकंदरपुर क्षेत्र में भी खुशी की लहर है।
डॉ. इफ्तेखार खान का जीवन संघर्ष और समर्पण की प्रेरक कहानी है। शिक्षक परिवार में जन्मे इफ्तेखार ने गांव से अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। बचपन से ही चित्रकला के प्रति उनका विशेष लगाव था। पढ़ाई के दौरान उनकी कला प्रतिभा लगातार निखरती गई और आगे चलकर यही प्रतिभा उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।
उन्होंने उच्च शिक्षा के दौरान कला को अपना विषय बनाया और फाइन आर्ट्स में अध्ययन करते हुए आगे बढ़े। इसके बाद उन्होंने कला के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल की तथा शोध कार्य भी किया। वर्ष 1998 में राजकीय इंटर कॉलेज, बलिया में कला शिक्षक के रूप में नियुक्ति के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा देने के बजाय उनकी छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य शुरू किया।
हर रविवार बच्चों को नि:शुल्क कला शिक्षा
डॉ. इफ्तेखार खान की सबसे खास पहल यह रही कि उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए भी कला शिक्षा के दरवाजे खोल दिए। लंबे समय से वह प्रत्येक रविवार बच्चों को अपने स्तर से नि:शुल्क कला प्रशिक्षण देते रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में बड़ी संख्या में बच्चों ने चित्रकला और कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
उनका मानना है कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपनी प्रतिभा के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
गुरु दक्षिणा में मांगा पेड़
डॉ. खान की शिक्षा पद्धति में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी शामिल रहा। विद्यार्थियों और अभिभावकों से गुरु दक्षिणा के रूप में महंगे उपहार लेने के बजाय उन्होंने पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी। उनके इस प्रयास ने शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
कला शिक्षा, नि:शुल्क प्रशिक्षण, सामाजिक सरोकार और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक सम्मान मिल चुके हैं। अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने से उनकी वर्षों की मेहनत को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
किकोढ़ा की गलियों से शुरू हुआ डॉ. इफ्तेखार खान का सफर आज राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुका है। उनका यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि बलिया और पूरे पूर्वांचल के लिए गौरव का विषय है।
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